Copyright

myfreecopyright.com registered & protected

Monday, 9 September 2013

इश्क तू.....!

फिर ढलती शाम सूरज की रूह, रात के आगोश उतरी....
इश्क तू...!  खुदा में खुद को डूबोने जैसा.......
इबादत जैसे...

5 comments:

  1. इश्क इबादत है ...
    खुदा के करीब आने के लिए
    मन्नतें नहीं -
    मुहब्बतों की ज़रुरत होती है ....

    ReplyDelete
  2. Tujhmein rab deekhta hai...
    Sajde...sarr jhukta hai...
    Yaara main kya karoon....

    ReplyDelete
  3. बहुत ख़ूब इश्क़ जिसे हो बह ही समझ सकता है......

    ReplyDelete
  4. बिल्कुल सच वाह गहरी बात

    ReplyDelete